ब्रोकर और संभावित क्लाइंट्स के बीच इंट्रोड्यूसिंग ब्रोकर (IB) एक बिचौलिये के तौर पर काम करता है। IB का काम क्लाइंट्स को किसी ब्रोकर से इंट्रोड्यूस करवाना होता है और बदले में रेफ़र किए अपने क्लाइंट्स की ट्रेडिंग वॉल्यूम के आधार पर IB को पैसे मिलते हैं। ये पेमेंट आमतौर पर कमीशन-बेस्ड होती है और ये ब्रोकर और रेफ़र किए गए क्लाइंट्स पर निर्भर करती है। इस अरेंजमेंट के तहत व्यक्ति या कंपनियाँ एक प्रॉफ़िटेबल और फ़्लेक्सिबल बिज़नस खड़ा कर सकती हैं।
इंट्रोड्यूसिंग ब्रोकर (IB) पैसे कैसे कमाते हैं?
रेफ़र किए अपने क्लाइंट्स की ट्रेडिंग एक्टिविटी से जेनरेट होने वाली कमीशन और/या रिबेट के ज़रिए IB पैसे कमाते हैं। उदाहरण के लिए, किसी क्लाइंट को Axi जैसे किसी ब्रोकर से जोड़ने पर उस IB को उस क्लाइंट द्वारा किए गए ट्रेड से होने वाली कमीशन का एक हिस्सा मिल जाता है। कोई IB जितने ज़्यादा क्लाइंट रेफ़र करेगा और उसके क्लाइंट्स की ट्रेडिंग वॉल्यूम जितनी ज़्यादा होगी, उस IB की कमाई भी उतनी ही ज़्यादा हो सकती है।
इंट्रोड्यूसिंग ब्रोकर कौन बन सकता है?
कोई भी इंट्रोड्यूसिंग ब्रोकर बन सकता है, फिर चाहे वो कोई व्यक्ति हो, ग्रुप हो, या फिर कोई कंपनी हो। यही तो वो चीज़ है, जो सोलो एंटरप्रेन्योर से लेकर बड़ी-बड़ी पार्टनरशिप्स या कॉर्पोरेट संस्थाओं जैसे अलग-अलग बिज़नेस मॉडलों के लिए IB की भूमिका को एक फ़्लेक्सिबल मौका बना देती है।