मार्जिन के बारे में और डिटेल में जानने के लिए प्लीज़ नीचे दिया वीडियो देखें।
मार्जिन वो धनराशि होती है, जो कोई ट्रेड ओपन करने के लिए किसी ट्रेडर के अकाउंट में अवेलेबल होती है। किसी ओपन पोज़ीशन को बरकरार रखने के लिए आपके अकाउंट में हमेशा एक पर्याप्त मार्जिन होना चाहिए।
फ़ॉरेक्स और CFD ट्रेडिंग में मार्जिन के ज़रिए ट्रेडर अपने अकाउंट में मौजूद धनराशि से बड़ी पोज़ीशनें उठा पाते हैं। ये रकम उधार ली गई धनराशि नहीं होती, बल्कि उनके बैलेंस का ही एक हिस्सा होती है। इसकी बदौलत ये सुनिश्चित हो जाता है कि बाज़ार के उतार-चढ़ाव वाले हालातों में संभावित नुकसान की भरपाई के लिए ट्रेडर के अकाउंट में पैसा होगा।
"मार्जिन" और "लिवरेज" का अक्सर पर्यायवाची शब्दों के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
फ़्री मार्जिन = इक्विटी* – ओपन पोज़ीशन्स
*इक्विटी = बैलेंस +- PnL (प्रॉफ़िट एंड लॉस)
मार्जिन लेवल = (इक्विटी x 100) / मार्जिन
कोई ट्रेडिंग पोज़ीशन खोलने के लिए ज़रूरी मार्जिन का हिसाब लगाने के लिए प्लीज़ हमारे आवश्यक मार्जिन कैलकुलेटर को आज़माकर देखें।
मार्जिन के बारे में और डिटेल में जानने के लिए प्लीज़ नीचे दिया वीडियो देखें।
प्लीज़ ध्यान दें: इस मार्जिन टाइप को सिर्फ़ कुछ खास क्षेत्रों और सर्वरों में मौजूद कुछ खास तरह के अकाउंटों के ज़रिए ही एक्सेस किया जा सकता है।
हमारे डायनामिक मार्जिन स्ट्रक्चर से लिवरेज कम हो जाती है और मार्जिन की ज़रूरतें बढ़ जाती हैं। वो इसलिए कि हर प्रोडक्ट ग्रुप के टियर सेट के अनुसार आपकी ओपन पोज़ीशन के साइज़ में भी बढ़ोतरी आ जाती है।
FX और बुलियन स्पॉट कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट स्पेसिफ़िकेशन टेबल्स में प्रोडक्ट लिवरेज देखी जा सकती है। ये वो लिवरेज होती है, जो सिंबल मार्जिन रेट और अकाउंट लिवरेज सेटिंग्स, दोनों सेटिंग्स को ध्यान में रखते हुए आपको मिलती है।
बाकी CFD की मार्जिन आवश्यकताओं पर आपकी अकाउंट लिवरेज का तो कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन उन पर डायनामिक मार्जिन टियर्स का असर पड़ सकता है।
और जानने के लिए प्लीज़ इस प्रोडक्ट शेड्यूल को देखें।