परपेचुअल फ़्यूचर्स पर 'मेकर' और 'टेकर' फ़ीस के साथ-साथ फ़ंडिंग फ़ीस भी लागू होती है।
ये फ़ीस किसी पोज़ीशन को ओपन और क्लोज़ करते समय वसूली जाती हैं।
फ़ीस स्ट्रक्चर:
| मेकर फ़ीस | टेकर फ़ीस |
| 0.025% | 0.035% |
फ़ंडिंग फ़ीस समय-समय पर उन ट्रेडरों के बीच एक्सचेंज की जाने वाली वो पेमेंट होती हैं, जो किसी परपेचुअल फ़्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में लॉन्ग और शॉर्ट पोज़ीशन होल्ड कर रहे होते हैं। इसका मकसद परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट के प्राइस को अंडरलाइंग स्पॉट मार्केट (जिसे इंडेक्स प्राइस के तौर पर भी जाना जाता है) के करीब बनाए रखना होता है।
पारंपरिक फ़्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के विपरीत परपेचुअल फ़्यूचर्स की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। इस वजह से एक बैलेंसिंग मैकेनिज़्म के तौर पर काम करते-करते फ़ंडिंग पेमेंट फ़्यूचर्स मार्केट और असली स्पॉट मार्केट के बीच प्राइस कन्वर्जेन्स को बढ़ावा देती है।
फ़ंडिंग रेट, जिससे फ़ंडिंग फ़ीस निर्धारित होती है, को समय-समय पर बार-बार कैलकुलेट किया जाता है (एक्सचेंज के आधार पर ये काम हर 8 घंटे में किया जाता है)। मार्केट के हालातों के आधार पर ये पॉज़िटिव या नेगेटिव हो सकता है:
सैंपल कैलकुलेशन:
फ़ंडिंग रेट की दिशा के आधार पर अगली फ़ंडिंग इंटरवल में आपको या तो ये राशि देनी होती है या फिर लेनी होती है। फ़ंडिंग फ़ीस हर 8 घंटे (12:00 AM, 8:00 AM, और 4:00 PM UTC) में सेटल की जाती हैं।
| फ़ंडिंग रेट | लॉन्ग | शॉर्ट |
| +% | डेबिट | क्रेडिट |
| -% | क्रेडिट | डेबिट |